आज और कल के बीच, एक पुल होता है यादो का । आना जाना होता उस पर, कुछ बातो का कुछ वादो का । वक्त की धुप सताए तो , है शुक्र यादो का साया है । हम जैसे बर्वादो का, बस यादे ही सरमाया है। यादे गर न हो समझो, खुदा ही हमसे रुठ गया । खुद से भी न रहे रिश्ता बाकी, गर यादो का पुल टूट गया।