Tuesday, 4 July 2017

कभी महक की तरह हम गुलों से उड़ते हैं कभी धुएं की तरह पर्वतों से उड़ते हैं ये केचियाँ हमें उड़ने से खाक रोकेंगी की हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं


3 comments:

celebrating Independence Day.

तीन रंगो मे डूबा है,आज ये मेरा अपना जहाँ, कहीं केसरिया, सफ़ेद कही तो है कहीं हरा